दैनिक श्रेष्ठ सृजन-15-01-2020 (विजय शंकर)

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दैनिक श्रेष्ठ सृजन
संपादक (दैनिक सृजन) - वंदना नामदेव
हार्दिक शुभकामनाएँ-आ0 विजय शंकर जी
 १५ जनवरी २०२०
   शीर्षक- "आज का युवा इतना अधीर क्यों है?"
(परिचर्चा)
    
    यह सच है कि आज का नव युवक अधीर है।जमाना बदल गया है।समय के साथ साथ
पीढ़ियों में भी बदलाव हो रहा है। पहले दूरदर्शन और मोबाइल फोन नहीं थे।दो पहिया वाहन भी सीमित थे। यदि हम बिना जरुरत इन चीजों को खरीदते थे तो वह विलासिता पूर्ण माना जाता रहा है। अब समय डिजिटल हो चुका है।उपरोक्त सभी वस्तुएं सभी के लिए आवश्यक हो चुकी हैं।पहले सीमित संसाधनों में सभी कार्य सरलता से होते थे।माता पिता बच्चों के साथ लगे रहते थे। और बच्चे संस्कारवान होते थे।आज एक वर्ष का बच्चा मोबाइल पकड़ता है।हम खुश होते हैं।ढ़ाई साल के बच्चे को स्कूल भेज देते हैं, स्कूल में बैठना सीखेगा और हम कई घण्टों के लिए अपने से दूर रखते हैं।हम बच्चों को अधिक समय दें उनके साथ रहेंगे तभी तों
बच्चों की भावना और रुचि से परिचित हो सकेंगे , उन्हें समझ कर सही दिशा दे सकेंगे। बच्चे की
प्रवत्ति जल के प्रवाह की भांति होती है, जिधर ढ़ाल मिली उधर जल प्रवाह मुड़ गया। 
"माता शत्रु पिता बैरी येन बालेन न पाठित:।" 
स्कूल के शिक्षक या अन्य के भरोसे रहकर स्वयं ध्यान न देने से बच्चे बिगड़ सकते हैं,खराब आदतें सीख लेते हैं।हम अपनी स्वच्छंदता को दांव पर लगाकर ही अच्छे संस्कार दे सकेंगे।संस्कारवान का तात्पर्य धैर्यवान, शीलवान, धर्म में आस्था रखने वाला कर्मठ इंसान, लोभ और
लालच से दूर रहने वाला इंसान सदाचारी होता है। युवा जोशीले होने के साथ होश में रहकर , विचार कर ही कदम बढायें तो अधीरता निकट नहीं आयेगी।
-@विजय शंकर

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