मातु हे ईटालिके
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संगम सवेरा वेब पत्रिका
मातु हे ईटालिके! (हास्य-गीतिका)
जो चिपक बैठा उसे तो अब हटा दो कालिके!
एक कुरसी तो दिला दो मातु हे ईटालिके!
सोचकर पी एम बनेंगे उम्र बीती जा रही,
एक टुकड़ा राज का अब तो गिरा दो थालिके!
मॉक संसद में बजाएँ कब तलक हम तालियाँ,
घूँट सत्ता का हमें भी अब पिला दो प्यालिके!
घिस गए तलवे हमारे रोज़ भागमभाग से,
भाग्य का ताला हमारा अब खुला दो तालिके!
राह तकते-ताकते निष्प्राण कुनबा हो चला,
जीत का कोई नया पासा चला दो चालिके!
--©नवल किशोर सिंह
03.11.2026

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