प्रियतम मेरा हरजाई - प्रणय गीत
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प्रणय गीत
(एक प्रयास )
आधार - शोकहर / सुभंगी छंद
(8,8,8,6 अंत -गा)
उसका आना, खुशी खजाना, आँखें करतीं, अगवाई।
आकर डोले, मीठा बोले, प्रियतम मेरा, हरजाई।
पथ को घेरे, इत उत छेड़े, लिए शरारत, मुस्काए।
थोड़ी झिड़की, मीठी घुड़की, पाकर छलिया, बौराए।
गुनगुन करता, दूर न रहता, संग रहे ज्यों, परछाई।
जागी रातें, रस की बातें, प्यारी उसकी, कनबतियाँ।
अनुरागी मन, तन में शिथिलन, ऐसी उसकी, गलबहियाँ।
बहुत सताए, फिर भी भाए, छुअन सुखंकर, पुरबाई।
भागे सारे, नभ के तारे, पंछी चहके, भिनसारे।
रह-रह रह के, वह भी चहके, नैना चारों, रतनारे।
कली सुनाती, गीत प्रभाती, भली अली की, पहुनाई।
--©नवल किशोर सिंह
05/01/2026

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