हास्य मुक्तक -नवल किशोर सिंह

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बस ऐसे ही
एक हास्य -मुक्तक

खड़ी हो सामने आया, भरी हो पर्स में माया।
मनोरथ मानिनी की बस, रहे यह छरहरी काया।
भवानी-मंडली में भी, उन्हीं की धाक चलती हो,
भवन में भृत्य-सम वल्लभ, कहे हरदम 'अजी आया '।

-©नवल किशोर सिंह
 24.08.2022

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