दैनिक श्रेष्ठ सृजन-29/04/2021

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साहित्य संगम संस्थान
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# दैनिक श्रेष्ठ सृजन-29/04/2021#

संपादक (दैनिक सृजन) - आ.वंदना नामदेव
पंच-परमेश्वरी- 
1.आ.दीपमाला तिवारी
 2.आ.सरिता तिवारी 'राखी'

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हार्दिक शुभकामनाएँ🌷🌻🌹

श्रेष्ठ रचनाकार-
1.आ. रामगोपाल प्रयास जी
2.आ. ऐश्वर्या सिन्हा चित्रांश जी
3. आ. ब्रह्मनाथ पाण्डेय' मधुर' जी


श्रेष्ठ टिप्पणीकार- 
1.आ. कुमारी निरुपमा जी
           
      
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 विषय -उद्देश्य
विधा -गीत ( मात्रा भार 16 14  कुकुभ छंद पर आधारित चरणांत 2 2)


श्रमय साधना करो तपस्वी,जीवन सफल बनाना है ।
एक  दिन  मृत्यु का आलिंगन,उत्सव हमें मनाना है ।

जीवन,सरिता सा हो मानव ,खुद जल कभी न पीती हैं ।
परहित  कर  आगे  बढ़ जाना , ये  ही इनकी  नीती  है ।
बदले  में  कुछ  भी  नहिं लेना, यह  संस्कार  पुराना है । 
श्रमय  साधना  करो तपस्वी, जीवन सफल बनाना है  ।।

घटित घटा अरु घटे बंधुवर,यही नियति का फेरा है ।
वर्तमान  को  जीले  पगले , जागे जब ही  सबेरा है ।कथनी करनी रहे  एक सी , कोई  नहीं  ठिकाना है ।
श्रमय साधना करो तपस्वी,जीवन सफल बनाना है ।।

चादर मैली क्यों करता है , क्या लाया ले जायेगा ।
प्रीत लगाले सबसे मनुआ,समय लौट ना आयेगा ।                 कर्म यहां बस जीवित रहते,मृत्यु से न घबराना है ।
श्रमय साधना करो तपस्वी,जीवन सफल बनाना है ।।



स्वरचित
रामगोपाल प्रयास 
गाडरवारा म प्र


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 उद्देश्य ---- गीत
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हम सभी के जीवन का,
उद्देश्य कोई न कोई होता है,
सब योनियों में मानव जन्म,
सबसे खूबसूरत होता है.

जीवन का उद्देश्य समझो तुम,
भरे नैनों की पीड़ा समझो तुम,
बिन कहे बतियों को जान जाओ,
मानव धर्म सर्वोपरि है मान जाओ.

महापुरुषों के जीवन का लक्ष्य,
सदा से मानव सेवा रहता है,
समाज, देश और लोगों के हित में,
वह सर्वस्व न्योछावर करता है.

आज अगर है अँधियारा,
तो कल उजला रवि आएगा,
रोते -बिलखते नैनों से,
हर आँसू चुरा ले जायेगा.

चाहे जितनी बधाएं आएं,
हम कदम न पीछे हटाएंगे,
पर्वत का सीना चीरकर हम,
राह अमन की बनाएंगे.



कवयित्री
ऐश्वर्या सिन्हा चित्रांश
वाराणसी
नोट
--------- यह मेरी स्वरचित मौलिक रचना है.
@ कॉपीराइट.
[03/05, 18:19] Sarita Tiwari: - उद्देश्य:- गीत

सपनों को साकार करेंगे पग- पग क़दम बढ़ाएंगे|
एक- एक कर लक्ष्य हमारे पूरे होते जाएंगे||

चोटी पर हिमवान के जाकर रवि से बातें किया करें|
और चन्द्रमा के घर जाकर उससे बातें किया करें|
जब बुलंद हौसला रहेगा उच्च शिखर छू आएंगे||

हो उद्देश्य परम सुन्दर तो साथ ईश्वर देता है|
इच्छा की झोली को सारी खुशियों से भर देता है|
झूम- झूम कर सिन्धु हृदय में मस्त लहर लहराएंगे||

सपने देखो किन्तु उन्हें पूरा करने की चाह रखो|
हासिल हो हर लक्ष्य और सुन्दरतम् अपना राह रखो|
आसमान में डगर बनालो मंजिल चढ़ते जाएंगे||



                स्वरचित/ मौलिक
             ब्रह्मनाथ पाण्डेय' मधुर'
ककटही, मेंहदावल, 
संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश
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