दैनिक श्रेष्ठ सृजन-27/04/2021

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साहित्य संगम संस्थान
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# दैनिक श्रेष्ठ सृजन-27/04/2021#

संपादक (दैनिक सृजन) - आ.वंदना नामदेव
पंच-परमेश्वरी- 
1.आ.दीपमाला तिवारी
 2.आ.सरिता तिवारी 'राखी'

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हार्दिक शुभकामनाएँ🌷🌻🌹

श्रेष्ठ रचनाकार-
1.आ. भाष्कर बुड़ाकोटी "निर्झर" जी
2.आ. चन्द्र भूषण निर्भय जी
3. आ. अर्चना श्रीवास्तव 'आहना'  जी


श्रेष्ठ टिप्पणीकार- 
1.आ. प्रीति शर्मा जी
           
      
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प्राणवायु:- #छंद ( #कुंडलिया)

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(१)
होते हैं  सब  वृक्ष  नित,  प्राण-वायु  की  खान |
उनके  सतत   अभाव   से,   संकट   में  इंसान |
संकट   में   इंसान,   लगाओ   घर-घर   पादप |
हो  जीवन  संचार,  मिटे  जब  जग  में  आतप |
दिखे  अधर  मुस्कान,   दुखों   में  जो-जो  रोते |
प्राण-वायु  की  खान,   जगत  में   पादप  होते |

(२)
धरती में है वायु अब,  बहुत  अधिक  अनमोल |
जीवन-रक्षा  में  यही,   लाती  सकल  किलोल |
लाती सकल  किलोल,  यही  है  बहुत  जरूरी |
इसके बिन तो आज,  लगे  अब  आस  अधूरी |
कह 'निर्झर' बिन वायु, अभागिन जग में मरती |
यही  सतत  अनमोल,  बचाओ  जीवन  धरती |
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स्वरचित/मौलिक
©®सर्वाधिकार सुरक्षित
भाष्कर बुड़ाकोटी "निर्झर"
पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)

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प्राण वायु


धरती कहे पुकार के, प्राणवायु दरकार।
पेड़ पौधे लगाइये,   हो जीवन संचार।।

प्राण वायु प्रकृति धरा, कोरोना दे मात।
वेंटिलेटर लड़ रही, मुश्किल ये हालात।।

प्राण वायु संयत्र है , पीपल नीमा पास।
बृक्ष धरा बिलुप्त सभी,कठिनाई अब साँस।।



स्वरचित मौलिक
चन्द्र भूषण निर्भय
बेतिया, पश्चिम चम्पारण
बिहार

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 प्राणवायु
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        (1)
       हवा हूं मानों 
     रूप-रंग आकार 
      साकार तुम

     .(2)
      प्राणवायु ही
     संचालित सवर्त्र 
     एकसमान

         (3)
      त्राहिमाम से
      कराहा जन ,पस्त 
       वायु गुम है

           (4)
      हरियाली ही
      आधार प्राणवायु 
       स्पंदन बना

         (5)
      सुंदर वृक्ष 
      कटाई अंधाधुंध 
      पृथ्वी कंक्रीट

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# पूर्णत:स्वरचित और मौलिक
@अर्चना श्रीवास्तव 'आहना' ,मलेशिया

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