दैनिक श्रेष्ठ सृजन-06/05/2021

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# दैनिक श्रेष्ठ सृजन-06/05/2021#

संपादक (दैनिक सृजन) - आ.वंदना नामदेव
पंच-परमेश्वरी- 
1.आ.दीपमाला तिवारी
 2.आ.सरिता तिवारी 'राखी'

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हार्दिक शुभकामनाएँ🌷🌻🌹

श्रेष्ठ रचनाकार-
1.आ. राजेश कौरव सुमित्र जी
2.आ. प्रमोद कुमार चौहान जी
3. आ. बेलीराम कनस्वाल जी


श्रेष्ठ टिप्पणीकार- 
1.आ. रामगोपाल श्रीवास जी
           
      
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 #बोली/ वाणी/ जिव्हा 
#दोहे 

जिव्हा होती खास ही, दुहरे  रखें विभाग।
स्वाद सफर की सारथी,वाणी शोभित राग।।

जो करता अवहेलना, जिव्हा करती नाश ।
जो सहेज वश में रखे,जीवन भरे सुवाश।।

बिना विचारे स्वाद हित,खाते  रहते  लोग।
स्वास्थ्य बिगाड़े स्वयं का,भूल गए सब भोग।।

बिन  विचार जो बोलते,बोल बने तलवार।
ऐसे जन पाते नहीं,कभी किसी का  प्यार ।।

जिव्हा होती धनुष सम,वाणी तीर समान ।
चूके यदि  निशान सही,जीवन भर नुकसान।।



राजेश कौरव सुमित्र
नरसिंहपुर मध्य प्रदेश

★★★★★★★

 #साहित्य #संगम #संस्थान #मंच 
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       //कहमुकरी//
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            ||०१|| 

भांति-भांति की करे वे बातें |
कुछ न करके शोर मचाते || 
समझ न आती बोली | 
क्या सखि साजन ? 
ना सखि रोली |.| ०१ |.| 

            ||०२||

चाँद से चाँदनी की चमक रहती |
जैसे फूलों से खुशबू महकती || 
हो सभी मे प्यार ही प्यार | 
क्या सखि साजन ? 
न को कोई बार |.| ०२ |.| 

            ||०३|| 

चमन में बरसे सिर्फ मोहब्बत | 
दूर हो सबकी मुसीबत || 
राष्ट्र प्रेम का भाव रहें | 
क्या सखि साजन ? 
न भेद-भाव रहे |.|०३|.| 

            ||०४|| 

बक्त बड़ा ही महान होता है |
समय का फेर तान देता है || 
बक्त को जो पहचाने | 
क्या सखि साजन ? 
उसे ही सब जानें | 

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प्रमोद कुमार चौहान 
कुरवाई विदिशा मध्यप्रदेश 
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 वाणी- दोहा

संयम रखिए नित सदा , वाणी का कर तोल। 
अंतस में मथकर तभी, तोल मोल कर बोल।।१।।

वाणी में  संयम  रखो , वाणी   है   अनमोल।
गैरों   को  अपना  करें  , नेह  प्रेम  के  बोल।।२।।

दंभ  द्वेष  को  त्याग  के ,  मीठे  बोलें  बोल। 
झूठी शान दिखान को ,  क्यों  पीटें हम ढोल।।३।।

हृदय  तुला में तोल के,  मुख  से  बोलें  बोल।  
सारा  जग  अपना  बने, शहद  कान में घोल।।४।।



स्वरचित-
बेलीराम कनस्वाल 
घनसाली,टिहरी गढ़वाल,उतराखण्ड ।
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