दैनिक श्रेष्ठ सृजन-08/04/2021

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# दैनिक श्रेष्ठ सृजन-08/04/2021#

संपादक (दैनिक सृजन) - आ.वंदना नामदेव
पंच-परमेश्वरी- 
1.आ.दीपमाला तिवारी
 2.आ.सरिता तिवारी 'राखी'

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हार्दिक शुभकामनाएँ🌷🌻🌹

श्रेष्ठ रचनाकार-
1.आ. कुंज बिहारी यादव जी
2.आ. सरिता तिवारी राखी जी
3. आ. प्रीती देवी जी

 
 
श्रेष्ठ टिप्पणीकार- 
1.आ. कुंज बिहारी यादव जी
           
      
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 सौदागर -गीत 


ये दुनिया जो हमारी है सौदागरों की बस्ती है।
चाँदी की चमक महँगी जिन्दगी यहाँ सस्ती है।।

कागज के टुकड़ों पर ईमान यहाँ बिकते।
चेहरों पे मुखोटे हैं सूरत के भोले दिखते।
साहिल का पता नहीं मझधार में कश्ती है।।
ये दुनिया जो हमारी है सौदागरों की बस्ती है----

सिक्कों की खनक में यहाँ सिंहासन बिक जाते।
हिस्से के गरीबों के यहाँ राशन बिक जाते।
बेबस लोगों की यहाँ कीड़े सी हस्ती है।।
ये दुनिया जो हमारी है सौदागरों की बस्ती है---


स्वरचित मौलिक रचना 
कुंज बिहारी यादव 
नरसिंहपुर मध्यप्रदेश

★★★

सौदागर---गीत
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
पंछी प्यारे, चिट्ठियां ले जा संदेशा दे आ ,मेरी प्रीत के सौदागर की।।
न उलझना मीठी बतियां,बिन तुम कैसे कटें रतियां,तुम सौदागर की।
**************************
दिन महीने साल न जाने
पल-पल  खबर न लागे।।
प्रीत पराई कोई न जाने
दिन बीते तो रैना जागे।।
जाये न कोई प्रेम डगरिया,बरसे जो नैनन की।।।
तुम सौदागर की------------------
पंछी प्यारे-----------------------
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भूलूं कैसे दिल में बसे तुम
ख्वाबों में फिर से हंसे तुम।
दिल की बात कही सपने में
न जाने क्यों अपने लगे तुम।।
सांवरिया आते तुम रहना यूं ही अंखियन सपनों की।।।
तुम सौदागर की-------------
 पंछी प्यारे--------------------
**************************
मेरे मोहन सुनो,एक अरज है
अंतिम इच्छा पूरण तुम करना
दरश कराना स्व-सूरत तुम
ताकि आसां हो फिर मरना।।
सांवरिया से प्रीत रहे नित,एक तमन्ना इस मन की।।।
तुम सौदागर की------------
पंछी प्यारे--------------------
*************************
पंछी प्यारे चिट्ठियां ले जा संदेशा दे आ, मेरी प्रीत के सौदागर की।।
मत उलझना मीठी बतियां बिन तुम कैसे कटें रतियां ,तुम सौदागर की।।।
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सरिता तिवारी राखी
 जबलपुर मध्यप्रदेश

★★■■★★

 सौदागर

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तू जो है इश्क़ का सौदागर। 
जरा इश्क़ की कीमत तो बता।। 

नहीं है मेरे अल्फाज़ बिकाऊ
और ना ही ये मेरा दिल। 
माना बहुत अमीर है तू, किंतु
इतनी तो तेरे दौलत भी नहीं है, 
जो खरीद सके मेरा दिल। 
तू जो है इश्क का सौदागर.....। 
जरा इश्क़ की कीमत तो बता।। 

आँखों की ये चंचल चितवन, 
नहीं बिकाऊ  होंठो की मुस्कान। 
माना बहुत दिलदार है तू, किंतु
इतना तो प्रेम नहीं तेरे पास, 
जो खरीद सके मेरी मधुर मुस्कान। 
तू जो है इश्क़ का सौदागर.....। 
जरा इश्क़ की कीमत तो बता।। 

चेहरे की ये नूरानी चमक, 
नहीं बिकाऊ इन आँखों का काज़ल। 
माना बहुत खूबसूरत है तू, किंतु
इतनी तो  खुशियाँ नहीं तेरे पास, 
जो खरीद सके मेरी आँखों का काज़ल। 
तू जो है इश्क़ का सौदागर......। 
जरा इश्क़ की कीमत तो बता।। 



प्रीती देवी 
रायपुर छत्तीसगढ़
मौलिक व स्वरचित रचना।
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