दैनिक श्रेष्ठ सृजन-29/03/2021

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# दैनिक श्रेष्ठ सृजन-29/03/2021#

संपादक (दैनिक सृजन) - आ.वंदना नामदेव
पंच-परमेश्वरी- 
1.आ.दीपमाला तिवारी
 2.आ.सरिता तिवारी 'राखी'

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हार्दिक शुभकामनाएँ🌷🌻🌹

श्रेष्ठ रचनाकार-
1.आ. संगीता मिश्रा जी
2. आ. गीता परिहार जी
 

श्रेष्ठ टिप्पणीकार- 
1.आ. सरिता तिवारी 'राखी' जी
           
      
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 टालमटोली का विज्ञान_ निबंध


टालमटोल किसी चीज को देरी या स्थगित करने की क्रिया है। इस शब्द का उद्गम लैटिन लेटिनिनैटस से हुआ है, जो स्वयं उपसर्ग समर्थक से विकसित हुआ है, जिसका अर्थ है "आगे," और क्रैस्टिनस, जिसका अर्थ है "कल का।"
हममें से अधिकतर लोग अपने कई काम अक्सर कल पर टाल देते हैं. इसके कई कारण हो सकते हैं जैसेकि, हम अपने काम से जी चुराते हैं या फिर, अपने काम को खत्म करने में कुछ आलस कर जाते हैं. बहुत बार ऐसा भी होता है कि हम अपने जरुरी कामों को समय पर पूरा करने के महत्त्व को नहीं समझते और फ़ालतू के अन्य काम जैसेकि वीडियो गेम्स खेलना, एंटरटेनिंग वीडियोज़ देखना, बेवजह कहीं घूमने-फिरने चले जाना या फिर, गपशप मारना आदि करने लगते हैं जिससे हमारा बहुत कीमती समय बर्बाद हो जाता है. . इसी तरह, कारोबारी, पेशेवर या साधारण लोग भी अपने जरुरी और महत्त्वपूर्ण काम कल पर टाल कर फ़ालतू कामों या गपशप में अपना कीमती समय अक्सर बर्बाद कर देते हैं. ऐसा कभी-कभार होना तो एक सामान्य-सी बात है लेकिन, जब हम रोज़ाना अपने कई जरुरी काम कल पर टालने लगें तो यह काफी नुकसानदायक आदत साबित होती है. |, इस बेकार आदत के कारण हमारे परिवार, दोस्तों और समाज में हमारे सम्मान को भी चोट पहुंचती है. इतना ही नहीं, यह आदत हमारे आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचती है. 
अपने हरेक काम को कल पर टालने की इस ख़राब आदत से छूटकारा पाया जा सकता है| अक्सर किसी भी काम को टालने का सबसे बड़ा कारण काम का बोझ होता है. यदि हम अपने काम को कुछ छोटे-छोटे हिस्सों में बांट कर एक वक्त पर केवल एक ही काम करें तो इस समस्या से बहुत अच्छी तरह निपट सकते हैं. | 
एक ही माहौल में लंबे समय तक काम करते रहने से भी आपकी उत्पादकता पर बुरा असर पड़ता है. अगर किसी कार्य करने की जगह पर आपको आलस आ रहा हो या फिर तनाव या किसी किस्म की परेशानी हो रही हो तो यह सही समय है कि आप अपने वर्क स्टेशन में सकारात्मक बदलाव करें.|
समय पर अपने किसी भी काम समाप्त न कर पाने का एक बड़ा कारण यह भी है कि हम अपने समय का प्रबंध कुशलता से नहीं कर पाते हैं. . कभी-कभार हम जान-बूझकर किसी काम को पूरा करने में विलंब करते हैं और यह सोचते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. लेकिन जब ये छोटे-छोटे काम इकट्ठे होने लगेंगे और इनमें से अधिकांश कार्यों की डेडलाइन बहुत करीब होगी तो फिर इन सभी कामों को समय रहते अच्छी तरह पूरा करना काफी मुश्किल हो जाता है. नतीजतन, हमारा तनाव बढ़ जाता है.|
जब हम किसी काम को करने का निश्चय कर लेते हैं तोहम  उस काम को पूरे समर्पण के साथ पूरा करें. एक बार इरादा कर लेने पर हमको कोई बहाना नहीं बनाना चाहिए. 
अंत में हम सिर्फ इतना ही कहना चाहते हैं कि, हम लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर भी अपना बिता हुआ समय दुबारा हासिल नहीं कर सकते हैं. इसलिए, कभी-कभार आलस करना या अपने किसी काम को कल पर टालना तो ज्यादा गंभीर मुद्दा नहीं है लेकिन हम अपने आलस और नासमझी के कारण अपने ही समय को बर्बाद करने के बुरे परिणामों में बारे में जरुर गंभीरता से सोचें और अपने समय का सदुपयोग करने के लिए अपने रोज़मर्रा के जीवन में सभी छोटे-बड़े कामों को तुरंत निपटाने की कोशिश करना शुरू कर दें.





       #संगीता मिश्रा (बोलती लेखनी)

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 टालमटोली का विज्ञान: निबंध

  अक्सर देखा गया है कि बच्चे जो देखते हैं, वैसा ही अनुकरण करते हैं,यदि अभिभावक को टालमटोली की आदत है, तो बच्चा भी वही सीखते हुए बड़ा होता है।घर के अभिभावक को खुद इस आदत से बचना चाहिए। बच्चे स्वत: इस टाल-मटोल से दूर रहेंगे। स्वयं काम को समय पर करने की आदत बनाएं।सुस्ती और आलस्य का त्याग कर कार्य को समय पर निपटाने का संकल्प लें।
यह भी यह भी देखा गया है कि ऐसे लोग जो कम तनख़्वाह और अनिश्चित या छोटी अवधि के रोज़गार मैं होते हैं वे इस आदत के ज़्यादा शिकार होते हैं। आज का काम कल पर टालने  वाले अक्सर  जीवन की दौड़ में पिछड़ जाते हैं।अच्छा रोजगार, अच्छा भविष्य, अच्छा जीवन इन सब से वंचित रह जाते हैं। ऐसे लोग भाग्य को कोसते नजर आते हैं।
 इनकी असफलता इन्हें तनावग्रस्त रखती है। किंतु आलस्य इनका पीछा नहीं छोड़ता। बहुत से ऐसे लोग हमें मिल जाते हैं ,जो यह कहते पाए जाएंगे ,कल कर लूंगा ,अभी बाद में देख लूंगा और वह कल या बाद कभी नहीं आता। आप ऐसे लोगों से मदद की आशा तो बिल्कुल नहीं कर सकते क्योंकि इन्हें आपको टरकाने, या टालने और लटकाने की भी आदत होती है।
टालमटोली इनकी कमजोरी होती है, जिसे ये अपनी चतुराई समझते हैं।ऐसे इंसान में संकल्प का अभाव होता है।इरादे कमजोर होते हैं और हिम्मत की कमी होती है। वे किसी तरह का खतरा उठाना नहीं चाहते। ऐसे व्यक्ति कामचोर भी कहलाते हैं और कोई उन पर विश्वास नहीं करता।
वैसे इस आदत से छुटकारा पाना मुश्किल भी नहीं है।यदि हमें अपनी कमजोरी का अहसास हो तो उसे दूर करने का प्रयास करना चाहिए।कई बार हम अनावश्यक कामों की वजह से जरूरी कामों को पूरा नहीं कर पाते हैं इसलिए भी टालमटोल करते हैं।
कभी किसी काम को करने में अरुचि काम को पूरा नहीं होने देती।
ऐसे लोगों को हर काम के लिए समय निर्धारित करना चाहिए।यदि काम बड़ा है तो समय की पाबंदी पालन करने से ही ऐसी कुटेव पर विजय पाई जा सकती है।
आज के सन्दर्भ में मोबाइल फोन और इंटरनेट ने भी इस आदत को बढ़ावा दिया है।
समय बीत जाने पर सिवाय पछतावे के कुछ नहीं बचता,कहावत है"
का बरखा जब कृषि सुखानी" और,"अब पछताए होत क्या,जब चिड़िया चुग गई खेत"!



गीता परिहार
अयोध्या
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