दैनिक श्रेष्ठ सृजन-22/04/2021


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# दैनिक श्रेष्ठ सृजन-22/04/2021#

संपादक (दैनिक सृजन) - आ.वंदना नामदेव
पंच-परमेश्वरी- 
1.आ.दीपमाला तिवारी
 2.आ.सरिता तिवारी 'राखी'

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हार्दिक शुभकामनाएँ🌷🌻🌹

श्रेष्ठ रचनाकार-
1.आ. संगीता मिश्रा जी
2.आ. ऐश्वर्या सिन्हा चित्रांश जी
3. आ. प्रीति शर्मा"पूर्णिमा"  जी


श्रेष्ठ टिप्पणीकार- 
1.आ. जयहिंद सिंह हिंद जी
           
      
                   ******


 अर्चना के स्वर भर दे


हे  कृष्णा मुझे में अर्चना के स्वर भर दे.....

भक्ति की  पिचकारी मे सब रंग भर दे 
लाल गुलाल का प्रेम उड़ा दे

हरे रंग में करूणा  से भर दें 
पीला रंग ममता का लगा दे 

नारंगी की खुशियाँ दे दे 
लगा नीला रंग शांति दे 

हे कृष्णा मुझे भी रंग से रंग दें...

 गुलाबी का प्रेम रंग उड़ा दे 
कत्थई की  दया छिड़क  दे

ऊपर से अपनापन का जल उलेड़ दे 
 रंग में अपने पूर्ण भीगो दे 

फिर जीवन भर भीगी  रहूँ मैं 
किसी धूप से कभी न सूखूँ मैं

हे कृष्णा मुझे में अर्चना के स्वर भर दे......



   #संगीता मिश्रा (बोलती लेखनी)

★★★★★

 अर्चना के स्वर जगा दो

अर्चना के स्वर जगा दो,
आज सियाराम को बुला दो,
बादल दुःख के छट जाएंगे,
अँधेरे रस्ते भी कट जाएंगे,
ह्रदय की पीड़ा उनको बतादो,
अर्चना के स्वर आज जगा दो.

सुदामा की पीड़ा जैसे हरे थे,
द्रोपदी की लाज जैसे रखे थे,
अहिल्या उद्धार जैसे किया था,
रावण का नाश जैसे किया था,
आज प्रभु जी को याद दिला दो,
अर्चना के स्वर आज जगा दो.

आज संकट विकराल है छाया,
कोरोना दानव ने नर संहार है मचाया,
कोई न रास्ता अब सूझ रहा है,
मानव ज़िन्दगी के लिए जूझ रहा है,
प्रभु जी सुदर्शन आज चला दो,
मेरे भारत का सर्वत्र भला हो,
सियाराम को आज मना लो,
अर्चना के स्वर तीव्र जगा दो.



कवयित्री
ऐश्वर्या सिन्हा चित्रांश
वाराणसी
नोट
===== यह मेरी स्वरचित, मौलिक रचना है.

★★★★★★★

 प्रार्थना के स्वर जगा

मां ऐसा वरदान दे मुझे,अर्चना के स्वर जगा। 
मैं निपट अज्ञानी शरण,शरणागत का भय भगा।। 

हो भजन नित जिव्हा से और हृदय में धारण करूं।
जप निरन्तर नाम तेरा,तपस्विनी आचरण करूं। 
तेरे बिना इस जगत मैया नहीं कोई है सगा....।।
मैं निपट अज्ञानी शरण...

जप तप और उपवास करूं श्रद्धा भक्ति धारण कर।
भक्त औ भगवान के बिच कड़ी यही है पारण कर। 
शाकाहारी कर आहार या फिर निराहार पगा... ।।
मैं निपट अज्ञानी शरण....

चौकी चन्दन की बिछाऊं आसन सुमन मन मोहे
 लाल रंग चुनरी उडा़ऊं महारानी मुख सोहे
चैत्र के शुक्ल पक्ष मात के नवरात्रि की जोत जगा...।।
मैं निपट अज्ञानी शरण....

शुभ कलश रख वरूण देव नवग्रहों का करूं पूजन
सर्वप्रथम मैं गणेश मनाऊं कर जोड अभिनन्दन। 
पावन दिन हैं माता के,नित मां के जयकार लगा...।। 
मैं निपट अज्ञानी शरण...



प्रीति शर्मा"पूर्णिमा"
22/04/2021
    ■■■■◆■■■■★★★★★●★★★★

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