दैनिक श्रेष्ठ सृजन-13/04/2021

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# दैनिक श्रेष्ठ सृजन-13/04/2021#

संपादक (दैनिक सृजन) - आ.वंदना नामदेव
पंच-परमेश्वरी- 
1.आ.दीपमाला तिवारी
 2.आ.सरिता तिवारी 'राखी'

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हार्दिक शुभकामनाएँ🌷🌻🌹

श्रेष्ठ रचनाकार-
1.आ. रीतू गुलाटी जी
2.आ. हंसराज सिंह "हंस"  जी
3. आ. बसंत कोष्टी 'ऋतुराज' जी
4. आ. प्रेमलता उपाध्याय" स्नेह "


 
 
श्रेष्ठ टिप्पणीकार- 
1.आ. अर्चना श्रीवास्तव जी
           
      
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हिंदु नववर्ष..चौबोला छंद

 दुर्गा माँ मुझे दुलारती। 
जब-जब मैं उसे पुकारती। 
अपना भाग्य मैं सँवारती। 
रो रोकर आज पुकारती।

 माता तू अपना संग दे।
 प्रेम सें तू आज रंग दें। 
मुझसें दूरी  कभी न रहें।
 काँटा जिंदगी में न रहें।

 दुखिया विनती माँ से करें। 
हाय धीरज अब नही धरें। 
डूबें दिल मेरा,माँ  डरें। 
मुश्किल मे मनवा अब डरें। 

भाग्य अपना सँवार लें। 
कदमो में माथा डाल लें। 
माँ की महिमा अब जान लें।
 आजा हम चरण पखार लें। 

मात का हरदम ध्यान लगे। 
दया  माता की हमें मिलें।
 माँ भूल कोई कभी न हो।
 पापी समझ माँ  दूर न हो। 



स्वरचित
रीतूगुलाटी ...

★★★★★★

हिंदू नव वर्ष 

             #विधा - कुण्डली 

चला  गया  फागुन हमें, दे सुंदर  नववर्ष।
विनती   है  माॅ  शारदे,  दूर  करो  संघर्ष।
दूर करो  संघर्ष,अमृतमय जीवन कर दो।
हर लो सारे कष्ट, खुशी से झोली भर दो।
कहते कविवर हंस, नवागत संवत्सर का।
लगता  चैत  महीना  है  मोती  सुंदर  सा।

नव संवत्सर आगमन, हुआ चैत के साथ।
विनय करूॅ  माँ  आपसे, जोडू दोनों हाथ।
जोडू   दोनों  हाँथ, बजाऊॅ  शंख   मृदंगा।
करो  कृपा  हे मातु, बहे खुशियों की गंगा।
कहते कविवर हंस, ज्ञान समृद्धि  बढ़ाओ।
माॅ का पूजन करो,धूप फल फूल चढ़ाओ।

           

    स्वरचित अप्रकाशित रचना C.C.
हंसराज सिंह, "हंस" प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

★★★★★

हिन्दू नववर्ष  - दोहा
नव संवत्सर का हुआ,  धरती  पर  आगाज। 
खुशियाँ लेकर आ गया, घर-घर नूतन आज।। 

चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा,  हिन्दू नूतन वर्ष। 
करते  मंगल  कामना,  हो सबका उत्कर्ष।। 

बदला नूतन वर्ष में,  प्रकृति  का  परिवेश। 
दुलहन-सी धरती सजी, खुश है सारा देश।। 

तरुवर नव किसलय धरें, वन -वन खिले पलाश। 
स्वागत को कलियाँ खिलीं, दमके नवल प्रकाश।। 

मतवाली कोयल हुयी,  बुलबुल गाती गीत। 
खुशी मने नव वर्ष की, समय जाये न बीत।। 

खुशहाली से झूमता, कर्षक का परिवार। 
अन्न नया नव वर्ष में,  आया उनके द्वार।।

माता  की  आराधना,   करता  है  संसार। 
दूर सभी नव वर्ष में, मन के विषय-विकार।। 

नया  वर्ष  मंगल  करे,   है  पावन  संदेश। 
हो जग का सिरमौर यह, अपना भारत देश।। 
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      - बसंत कोष्टी 'ऋतुराज'
     रहली, जिला-सागर, मध्यप्रदेश
( मौलिक व स्वरचित)

★★★★★

नव वर्ष (विजया घनाक्षरी)
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(8888)=32 वर्ण प्रति चरण।
 चार चरण सम तुकांत।
 
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, हिंदू नव वर्ष सजा ,
फहरे केसरी ध्वजा, संवत्सर मनाइए ।

पावन शुभ वर्ष हो ,अपार मन हर्ष हो,
स्नेह का उत्कर्ष हो ,परंपरा निभाइए।

 रात दिन प्रगति हो ,निरंतर उन्नति हो,
 चित्त नव जागृति हो,उचाइयों पे जाइए।
 
 नित नव उमंग हो ,बसंती सब रंग हो ,
भावपूर्ण प्रसंग हो ,पुलकित हो जाइए।



प्रेमलता उपाध्याय" स्नेह "
दमोह (मध्य प्रदेश)
   
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