दैनिक श्रेष्ठ सृजन-30/07/2020

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दैनिक श्रेष्ठ सृजन-30/07/2020

संपादक (दैनिक सृजन) - आ.वंदना नामदेव
पंच-परमेश्वर- आ.विनोद वर्मा दुर्गेश

विषय : प्रेम में है शक्ति अपार
विधा : गीत
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-----हार्दिक शुभकामनाएँ🌷🌻🌹-------

परिणाम :
१.  श्रेष्ठ रचनाकार : आ0 सुनीता जौहरी जी
२. श्रेष्ठ रचनाकार : आ0 आशुतोष त्रिपाठी  'आलोक' जी
३. श्रेष्ठ रचनाकार : आ0 कलावती करवा जी
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श्रेष्ठ टिप्पणीकार : आ0 डाॅ. रोहित कुमार जी

rohit

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1)

प्रेम विराट है ,प्रेम सर्वत्र है,
प्रेम आनंद है ,अवर्णनीय एहसास है,
यह असीमित विस्तार है
प्रेम में शक्ति अपार है ।।

प्रेम की भाषा मौन है ,
मानव मन का भाव है 
शब्द हो जब अर्थ रहित ,
प्रेम बीज का प्रस्फुटन हो वही 
अपनत्व का भाव ही प्यार है,
प्रेम में शक्ति अपार है।।

अभिव्यक्ति का संपूर्ण कोष
जब हो जाए रिक्त
एहसास से प्रेम को
भर लो अपना चित्त
जीवन का का आधार है,
प्रेम में शक्ति अपार है।।

sunit

-सुनीता जौहरी 
वाराणसी


2)

न जाने जो यहां की माया,
सुख दुख का यह है संसार।
हार जीत जो करवाए,
उस,प्रेम में है शक्ति अपार।।

क्या जग में है रखा यारों,
बस खोना व पाना है।
आपस में हमे मिलजुल  
दीपक, प्रेम का ही जलाना है।
छोड़ो दुनिया भर की रंजिश,
भला न इससे होगा यार।
करलो सबको अपने वश में,
बांट-बांट सबको यहां प्यार।।

जीत सके न कोई दौलत से,
बल भी नहीं जिताता यार।
साहस शक्ति भरे तन मन में,
प्रेम में है शक्ति अपार।।
हार जीत जो करवाए उस 
प्रेम में है शक्ति अपार।।

मीठी बोली छूती दिल को,
देती अपनापन भर प्यार।
क्रोध लड़ाई में मिलकर यह,
दूर करे पल में टकरार।।
मिलो किसी से मीठा बोलो,
जाता क्या इसमें है यार।
हार जीत जो करवाए 
उस प्रेम में है शक्ति अपार।।

भाषा समझें पशु पंछी भी,
प्रेम है ऐसा पावन बोल।
बड़े से बड़ा भी राज छुपाया,
आगे प्राणी देता खोल।।
बिन कुछ देकर भी सब पाना,
ऐसा यह अनमोल उपहार।
हार जीत जो करवाए,
उस प्रेम में है शक्ति अपार।।

ashu tri


 -©️आशुतोष त्रिपाठी  'आलोक'
अयोध्या, उत्तर प्रदेश।

3)
 
प्रेम प्यार की भाषा प्यारी, 
प्रेम ही जीवन सार है।
प्रेम से दिल जीते  सबका ही, 
प्रेम जीवन आधार है।

प्रेम से मीठी वाणी बोले, 
व्यवहार से प्यार बरसाये ।
दुश्मन का दिल भी पिघले, 
प्रेम जो दुश्मन से पाये।

प्रेम सदा सबके  मन भाये, 
प्रेम बस  सारा संसार है।
प्रेम से दिल जीते  सबका ही , 
प्रेम जीवन आधार है।

शब्दों से हम प्यार बरसाए, 
शब्द शब्द में सार हो। 
शब्द सदा ऐसा चुने हम , 
शब्दों में प्यार अपार हो ।

शब्द निरर्थक  ना हो कभी, 
शब्दों की महिमा अपार है। 
प्रेम से दिल जीते सबका ही , 
प्रेम जीवन आधार है।

सदा प्रेम से रहे सभी हम, 
प्रेम लगाए नैया पार है। 
प्रेम ही जीवन  सार हमारा, 
प्रेम में शक्ति अपार है। 

जो प्रेम को समझे मानव , 
प्रेम शब्द साकार है।
प्रेम से दिल जीते सबका ही , 
प्रेम जीवन आधार है

शब्द - शब्द मधु घोलिए, 
प्रेम सबको स्वीकार है 
बांटे  हम प्यार ही प्यार, 
प्रेम पर सबका अधिकार है। 

बिना प्रेम प्रभु नहीं मिलते, 
जीवन अटके मझधार है।
प्रेम से दिल जीते सबका ही , 
प्रेम जीवन आधार है।

प्रेम प्यार की भाषा प्यारी, 
प्रेम ही जीवन सार है।
प्रेम से दिल जीते  सबका ही, 
प्रेम जीवन आधार है।



-कलावती कर्वा
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